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प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आदर्श वाक्य

प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में हमारा निरंतर प्रयास रहता है कि सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उपरोक्त गुण प्रदान किये जायें, ताकि हमारे संगठन की कार्यशैली उनमें प्रतिबिंबित हो सके.

गर्व - भारतीय नागरिक समाज में अपने स्थान और उस अवसर पर हमें गर्व होना चाहिये जिसमे हम रेल कर्मचारी के रूप में देश की सेवा करते हैं.

जोश - हमें अपने काम और उन लोगों के प्रति भावपूर्ण होना चाहिये जिन्हें हम सेवायें प्रदान करते हैं.अपने यात्रियों/उपयोगकर्ताओं को प्रदान की जाने वाली सेवाओं मेंगुणात्मक सुधार करने की तुलना में उन्हें संतुष्टि प्रदान करने से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है.

गतिशीलता - हमें हमेशा याद रखना चहिये कि हमारे पास करने के लिये बहुत कुछ हैऔर हमें जितनी तेजी से हो सके अपने काम निपटाने होंगे , हमें शीघ्र परिणाम देने के प्रयास करने होंगे.

व्यवसायिकता - हमें अपने दृष्टिकोंण से व अपनी जिम्मेदारी के प्रति पेशेवर सोच अपनाने की जरूरत है.यह प्रतिबद्धता , ध्यान और उत्कृष्टता प्राप्त करने का मूलमंत्र है.इसका यह भी अर्थ है कि एक ऐसा वातावरण तैयार हो जो आजीवन सीखने और प्रशिक्षित होतेरहने को मूल्यवान बनाये.

 

TRAINING COURSE MOTTO

In the Training Courses, it is our constant endeavor to impart the above qualities in all over Trainees Officers. So as to reflect them in the work style of our organisation.

PRIDE: We should be proud of our place in the Indian civil society and the opportunity, which has been given to us to serve the nation as railway employee.

PASSION: We need to be passionate about our work and the people we serve. Nothing can be more enriching of satisfying than making qualitative improvements in the service provided to our users/commuters.

PACE: We must always remember that we have a lot to do and the need get on with our jobs as fast as possible. We must strive to show quick results.

PROFESSIONALISM: We need to be professional in our outlook and our approach towards our responsibilities. This calls for commitment, focus and a desire to excel. This also means creating an environment that values lifelong learning and training.