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भारतीय रेल (आईआर) एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है तथा एकल प्रबंधनाधीन यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। यह १५० वर्षों से भी अधिक समय तक भारत के परिवहन क्षेत्र का मुख्य संघटक रहा है। यह विश्व का सबसे बड़ा नियोक्ता है, इसके १६ लाख से भी अधिक कर्मचारी हैं। यह न केवल देश की मूल संरचनात्माक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है अपितु बिखरे हुए क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने में और देश राष्ट्री य अखंडता का भी संवर्धन करता है। राष्ट्री य आपात स्थिति के दौरान आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में भरतीय रेल अग्रणी रहा है।

अर्थव्यस्था में अंतर्देशीय परिवहन का रेल मुख्य माध्यम है। यह ऊर्जा सक्षम परिवहन मोड, जो बड़ी मात्रा में जनशक्ति के आवागमन के लिए बड़ा ही आदर्श एवं उपयुक्त है, बड़ी मात्रा में वस्तुओं को लाने ले जाने तथा लंबी दूरी की यात्रा के लिए अत्यन्त उपयुक्त हैं। यह देश की जीवन धारा हैं और इसके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए इनका महत्वपूर्ण स्थान है। सुस्थापित रेल प्रणाली देश के दूरतम स्थारनों से लोगों को एक साथ मिलाती है और व्यापार करना, दृश्य दर्शन, तीर्थ और शिक्षा संभव बनाती है। यह जीवन स्तर सुधारती है और इस प्रकार से उद्योग और कृषि का विकासशील त्वरित करने में सहायता करता है।

[भारत में रेलों की शुरुआत 1853 में अंग्रेजों द्वारा अपनी प्राशासनिक सुविधा के लिये की गयी थी] परंतु आज भारत के ज्यादातर हिस्सों में रेलवे का जाल बिछा है और रेल परिवहन का सस्ता और मुख्य साधन बन चुकी है।सन् 1853 में बहुत ही मामूली शुरूआत से जब [पहली अप ट्रेन ने मुंबई से थाणे तक (34 कि.मी. की दूरी) की दूरी को तय किया था,] अब भारतीय रेल विशाल नेटवर्क में विकसित हो चुका है इसके 63,465 कि.मी.मार्ग की लंबाई पर 7,133 स्टेलशन फैले हुए हैं। उनके पास 7,910 इंजनों का बेड़ा हैं; 42,441 सवारी सेवाधान, 5,822 अन्य3 कोच यान, 2,22,379 वैगन (31 मार्च, 2005 की स्थिति के अनुसार)।[ भारतीय रेल बहुल गेज प्रणाली] है;जिसमें ब्राड गेज (1.676 मि मी) मीटर गेज (1.000 मि मी); और नैरो गेज (0.762 मि मी. और 610 मि. मी)है, उनकी पटरियों की लंबाई क्रमश: 89,771 कि.मी; 15,684 कि.मी. और 3,350 कि.मी. है। जबकि गेजवार मार्ग की लंबाई क्रमश: 47,749 कि.मी; 12,662 कि.मी. और 3,054 कि.मी. है। कुल चालू पटरियों की लंबाई 84,260 कि.मी. है जिसमें से 67,932 कि.मी. ब्राड गेज, 13,271 कि.मी. मीटर गेज, और 3,057 कि.मी. नैरो गेज है। लगभग मार्ग किलो मीटर का 28 प्रतिशत, चालू पटरी 39 प्रतिशत और 40 प्रतिशत कुल पटरियों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

The first trains in India?

The customary answer to this question is 3:35pm on April 16th, 1853, when a train with 14 railway carriages and 400 guests left Bombay's Bori Bunder for Thane, with a 21-gun salute. It was hauled by three locomotives: Sindh, Sultan, and Sahib. The journey took an hour and fifteen minutes.

That, however, was just the first commercial passenger service in India. In fact, a steam loco, Thomason, had been used for hauling construction material in Roorkee for the Solani viaduct in 1851 (it began working there on 22nd December 1851, to be exact). The Solani viaduct construction was a part of the Ganges Canal project, started in 1845. The viaduct had 15 arches and spanned the 4km-wide Solani valley (about 145km north-east of New Delhi). Earth for the approach embankments was transported along light rail lines about 5 to 10 km long from Piran Kaliyar to Roorkee. Standard gauge wagons were used, built from parts brought over from England, and hauled by men and later horses. In late 1851, the locomotive Thomason (named for the engineer on the project) was assembled on the spot from parts transported from Calcutta. It hauled two wagons at a time, at a speed of about 6km/h. It did not last very long, and after about 9 months India's first steam locomotive died a spectacular death with a boiler explosion, reportedly to the delight of the construction workers who had viewed it more as a hindrance than help. Hughes' book states that this was a six-wheeled tank engine, probably a 2-2-2WT built by E. B. Wilson, and of standard gauge. Some details of the wagons and the use of the locomotive are in Sir Proby T Cautley's "Report on the Ganges Canal Works" (3 volumes, 1860).

"[The railway is] a triumph, to which, in comparison, all our victories in the East seem tame and commonplace. The opening of the Great Indian Peninsular Railway will be remembered by the natives of India when the battlefields of Plassey, Assaye, Meanee, and Goojerat have become landmarks of history." (The Overland Telegraph and Courier, April 1853)

The second locomotive to arrive in India was Falkland (named for a governor of Bombay), used by the contractors of the GIPR for shunting operations on the first line out of Bombay that was being built. It began work on February 23, 1852. Hughes' book suggests that this was also built by E. B. Wilson, and was probably a four-wheeled tank engine (0-4-0T?) with dummy crankshaft. It later became GIPR loco #9. A third locomotive, Vulcan, is said to have been used by the GIPR for material hauling and shunting duties in 1852 as well.

There were also eight more locos from Vulcan Foundry imported by GIPR in 1852 and 1853.

On November 18, 1852, a locomotive hauled some coaches on a trial run from Bori Bunder to Thana. This probably counts as the first "real" train to run in India.